خامیم و وجود ما همه خام شده حیران و سرگشته و بدنام شده
ما جمله اسیریم در بند وجود او جمله اسیر دانه و دام شده
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چون گام نهیم دمی بر بام وجود بیزار شویم جمله ز فرجام وجود
از نیست بر آمده به هستی مستی در دام بیاورد جهان در شام وجود
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خداوندا دلم را پر ز خون کن ز اشک دیده ام دل لاله گون کن
درونم را درونم را ز عشقت الهی غم بیفزا واژگون کن
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یکی درد آشنا دردی به ما گفت که از دردش درون من بر آشفت
همی گفت از فروغ دولت یار که نور هیبتش چشمم به هم دوخت
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خدایا دولت وصلم تبا شد دلم از درد دل گوئی ز جا شد
همی گریم شب و روز از بر یار ز گری من قیامت گو به پا شد
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ز بر خوانم سرود هستی و نیست چو بر خوانم نمی دانم که از کیست
میان موجها افتاده کاهی نمی دانم که این شور و شر از چیست
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همو کاتش به سینه میزد انروز به دیدارم بیامد پیش پریروز
چنان آتش بزد آخر به جانم که می سوزم از آنروز تا به امروز
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همه دردم همه دردم همه درد از این درد گشته رویم جملگان زرد
چه گویم با که گویم زین شب سرد که بگرفته زسر تا پای من برد
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اسیرم اسیرم اسیر اسیر که نفسم شده مر به مو چیر چیر
اسیرم اسیرم به زندان تن که گه نیزه بارد به من گاه تیر
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دلی دارم فتاده در میانی به گردش مانده زنگار جهانی
دلی کز غم هزاران پاره می گشت دون سینه مانده جاودانی
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درونم را درونم شعله افروخت وزان شعله همه جانم همه سوخت
درونی را درونی جمله اش سوز گهی می ساخت انرا گاه می سوخت
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غمم جمله غمم جمله غم غم از این غم آمده دنیا به ماتم
غمم بر سینه می زد هر زمان غم از این غم پشت هر آلاله ای خم
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همه سوزم همه سوزم همه سوز درونم گشته برق اتش افروز
بسازم مر بسوزم مر بسازم بسوزم می کشم هر شو پس روز
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غمم بر سینه آتش می زنه غم که این غم می زند آتش به عالم
همه عالم شده از غم همه غم غم عالم به غم ما همه کم
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چرا خواری چرا خواری چرا خوار چرا اینگونه ماندی پشت دیوار
چو گویندت چه آوردی ز کردار چه گوئی روز محشر تو به دادار
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گفتیم حدیث و شام شد وین عمر کوته فام شد
با رفتن ما نام شد یعنی که روزی شام شد
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این دهر که هر لحظه آن در عدمیست ور گوشه آن نهاد ستمیست
هر نقطه آن در نظر با خردان آرامگه بتی و یا جام جمیست
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رخساره پریشان کرد غمخانه تو ما را افغان به چمن افکند آن بلبل شیدا را
باز آمد و بازش برد آن نوگل رعنا را از عقل چه امیدی کو باز برد ما را
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شعر امروز نقل یک افسانه نیست وصف ساقی و می و میخانه نیست
شعر امروز شعر رنگ است و حیات با درخت و زندگی بیگانه نیست
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